
वाराणसी, 31 जनवरी 2008। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर विश्वविद्यालय हेल्थ सेण्टर के निकट अयैर मैदान से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों द्वारा पथ-संचलन विश्वविद्यालय के स्थापना स्थल तक निकाला गया। विश्वविद्यालय प्रशासन की सक्रियता के बीच स्वयंसेवको का समूह घोष के थाप पर समता करते हुए कदम से कदम मिलाकर संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार, संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर एवं महामना के विशाल चित्र के पीछे-पीछे पूर्ण गणवेश में अनुशासन बध्द चलते दिखाई दे रहा था।
इस अवसर पर काशी विभाग के बौध्दिक प्रमुख प्रो. वीरेन्द्र जायसवाल ने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय गरीब घर में पैदा हुए थे लेकिन अपने कृर्तत्व से वह सम्पूर्ण भारतवर्ष में महामना के रूप में लोकविख्यात हो गये। राष्ट्र निर्माण में युवकों की भूमिका को महामना ने सदैव प्राथमिकता दी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना इसका साक्षात उदाहरण है। महामना ने हिन्दुत्व को राष्ट्रीय नवनिर्माण का आधार बनाते हुए अपना सम्पूर्ण जीवन हिन्दी-हिन्दू-हिन्दुस्थान की सेवा में अर्पित कर दिया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और महामना के सम्बन्धों की चर्चा करते हुए श्री वीरेन्द्र जायसवाल ने कहा कि संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार एवं मालवीय जी स्वयं में कुशल संगठक थे और हिन्दू समाज संगठित अवस्था में एक महान शक्ति के रूप में खड़ा हो, इसलिए इस दृष्टि से देश में चलने वाले बहुविधि प्रयत्नों को उन्होंने सदैव प्रेरणा, सहयोग और अपना आशीर्वाद प्रदान किया। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा शुरू कराई और आर.एस.एस. का कार्यालय भी निर्मित्ता कराया जिसे आपातकाल में हिन्दुत्व विरोधी शक्तियों ने ध्वस्त करा दिया। मालवीय जी महान परम्पराओं के संरक्षण के लिए सदैव प्रत्यनशील रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजा मानसिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चितरंजन ज्योतिषी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि हिन्दू समाज में सुधार आन्दोलन को मालवीय जी ने अपने प्रयत्नों से गति प्रदान की। छुआछूत-अस्पृथ्यता के उन्मूलन संस्कृत भाषा व भारतीय संस्कृति के उन्नयन, देश के स्वातंत्र्य आन्दोलन को लक्ष्य तक पहुंचाने आदि अनेकों विषयों पर महामना ने अपनी पूरी शक्ति लगाकर समाज को प्रेरित किया। देश के स्वनाम धन्य अनेकों दिग्गज महापुरुषों ने अपनी कार्य प्रेरणा के पीछे मालवीय जी के जीवन को आदर्श माना है। वस्तुत: मालवीय जी साधना का ही परिणाम था कि भारत में हिन्दुत्व के अजस्र प्रवाह को स्वतंत्रता आन्दोलन के काल खण्ड में गति मिली। राष्ट्रीय जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मालवीय जी ने हिन्दू जीवन मूल्यों को प्रतिष्ठित किये जाने पर सदैव जोर दिया। मानवता और हिन्दुत्व मालवीय जी के लिए समानार्थी थे। हिन्दू जीवन मूल्यों से अनुस्युत मानवता के प्रति अपनत्व एवं सृष्टि के प्रति एकात्मभाव का प्रत्यक्ष प्रकटीकरण हमें मालवीय जी के जीवन को देखने को मिलता है।
कार्यक्रम का प्रारम्भ कुश पाण्डेय द्वारा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलगीत एवं सुधीर कुमार के एकलगीत से हुआ। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी 3.00 बजे संघ के स्वयंसेवक अयैर छात्रावास के सम्मुख एकत्रित हुए। बौध्दिक वर्ग के बाद अयैर छात्रावास के मैदान से 400 की संख्या में स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में कदम से कदम मिलाकर समता करते हुए विश्वविद्यालय स्थापना स्थल की ओर प्रस्थान किया। विश्वविद्यालय के मुख्यद्वार पर स्थापित महामना की मूर्ति पर भाग संघचालक प्रो. धर्म सिंह ने माल्यार्पण किया। तत्पश्चात पथ-संचलन करते हुए स्वयंसेवकों का समूह संतरविदास गेट, नगवा चुंगी होते हुए विश्वविद्यालय स्थापना स्थल पर पहुंचे और वहां पर राष्ट्रगीत वंदेमातरम् के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से संतोष शुक्ल, रविन्द्र सेट्टी, डॉ. वीजेन्द्र कुमार, डॉ. शुकदेव त्रिपाठी, सुनील किशोर द्विवेदी, श्यामसुन्दर तुलश्यान, डॉ. हरेन्द्र कुमार राय, दिनेश पाठक, गणपति तिवारी, नारायणी सिंह, अभय कुमार, विश्व प्रताप जी, विनोद जी एवं मणिचेलम सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अरूण कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सत्येन्द्र मिश्र ने किया।
इस अवसर पर काशी विभाग के बौध्दिक प्रमुख प्रो. वीरेन्द्र जायसवाल ने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय गरीब घर में पैदा हुए थे लेकिन अपने कृर्तत्व से वह सम्पूर्ण भारतवर्ष में महामना के रूप में लोकविख्यात हो गये। राष्ट्र निर्माण में युवकों की भूमिका को महामना ने सदैव प्राथमिकता दी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना इसका साक्षात उदाहरण है। महामना ने हिन्दुत्व को राष्ट्रीय नवनिर्माण का आधार बनाते हुए अपना सम्पूर्ण जीवन हिन्दी-हिन्दू-हिन्दुस्थान की सेवा में अर्पित कर दिया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और महामना के सम्बन्धों की चर्चा करते हुए श्री वीरेन्द्र जायसवाल ने कहा कि संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार एवं मालवीय जी स्वयं में कुशल संगठक थे और हिन्दू समाज संगठित अवस्था में एक महान शक्ति के रूप में खड़ा हो, इसलिए इस दृष्टि से देश में चलने वाले बहुविधि प्रयत्नों को उन्होंने सदैव प्रेरणा, सहयोग और अपना आशीर्वाद प्रदान किया। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा शुरू कराई और आर.एस.एस. का कार्यालय भी निर्मित्ता कराया जिसे आपातकाल में हिन्दुत्व विरोधी शक्तियों ने ध्वस्त करा दिया। मालवीय जी महान परम्पराओं के संरक्षण के लिए सदैव प्रत्यनशील रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजा मानसिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चितरंजन ज्योतिषी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि हिन्दू समाज में सुधार आन्दोलन को मालवीय जी ने अपने प्रयत्नों से गति प्रदान की। छुआछूत-अस्पृथ्यता के उन्मूलन संस्कृत भाषा व भारतीय संस्कृति के उन्नयन, देश के स्वातंत्र्य आन्दोलन को लक्ष्य तक पहुंचाने आदि अनेकों विषयों पर महामना ने अपनी पूरी शक्ति लगाकर समाज को प्रेरित किया। देश के स्वनाम धन्य अनेकों दिग्गज महापुरुषों ने अपनी कार्य प्रेरणा के पीछे मालवीय जी के जीवन को आदर्श माना है। वस्तुत: मालवीय जी साधना का ही परिणाम था कि भारत में हिन्दुत्व के अजस्र प्रवाह को स्वतंत्रता आन्दोलन के काल खण्ड में गति मिली। राष्ट्रीय जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मालवीय जी ने हिन्दू जीवन मूल्यों को प्रतिष्ठित किये जाने पर सदैव जोर दिया। मानवता और हिन्दुत्व मालवीय जी के लिए समानार्थी थे। हिन्दू जीवन मूल्यों से अनुस्युत मानवता के प्रति अपनत्व एवं सृष्टि के प्रति एकात्मभाव का प्रत्यक्ष प्रकटीकरण हमें मालवीय जी के जीवन को देखने को मिलता है।
कार्यक्रम का प्रारम्भ कुश पाण्डेय द्वारा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलगीत एवं सुधीर कुमार के एकलगीत से हुआ। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी 3.00 बजे संघ के स्वयंसेवक अयैर छात्रावास के सम्मुख एकत्रित हुए। बौध्दिक वर्ग के बाद अयैर छात्रावास के मैदान से 400 की संख्या में स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में कदम से कदम मिलाकर समता करते हुए विश्वविद्यालय स्थापना स्थल की ओर प्रस्थान किया। विश्वविद्यालय के मुख्यद्वार पर स्थापित महामना की मूर्ति पर भाग संघचालक प्रो. धर्म सिंह ने माल्यार्पण किया। तत्पश्चात पथ-संचलन करते हुए स्वयंसेवकों का समूह संतरविदास गेट, नगवा चुंगी होते हुए विश्वविद्यालय स्थापना स्थल पर पहुंचे और वहां पर राष्ट्रगीत वंदेमातरम् के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से संतोष शुक्ल, रविन्द्र सेट्टी, डॉ. वीजेन्द्र कुमार, डॉ. शुकदेव त्रिपाठी, सुनील किशोर द्विवेदी, श्यामसुन्दर तुलश्यान, डॉ. हरेन्द्र कुमार राय, दिनेश पाठक, गणपति तिवारी, नारायणी सिंह, अभय कुमार, विश्व प्रताप जी, विनोद जी एवं मणिचेलम सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अरूण कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सत्येन्द्र मिश्र ने किया।
प्रस्तुति : विश्वसंवाद केन्द्र काशी
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हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत है. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाऐं.
जवाब देंहटाएंएक निवेदन: कृप्या वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें तो टिप्पणी देने में सहूलियत होगी.
आपका स्वागत है ब्लॉग जगत में ,और आपके निरंतर लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं ........
जवाब देंहटाएंबता सकते हैं कब से आरम्भ हुआ है यह पथ सन्चलन ? स्वागत आपका ब्लॉग परिवार में.
जवाब देंहटाएंहार्दिक स्वागत
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
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